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मैने कब दर्द की ज़ख़्मो से शिकायत की है, हन मेरा जुर्म है की मैने मोहब्बत की है, आज फिर देखा है उसे महफ़िल में पठार बनकर, मैने आँखो से नही दिल से बगावत की है, उसको भूल जाने की ग़लती भी नही कर सकते टूट कर की है तो सिर्फ़ उसी से मोहब्बत की है.

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इश्क़ छुपता है छुपाने से कहाँ, यह... Ishq Hindi Shayari

इश्क़ छुपता है छुपाने से कहाँ, यह खुद बे खुद सामने आता है, नही बचता इस से कोई भी कभी, यह सब को ही बड़ा तड़पता है

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